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श्लोक 6.42.4  |
स दृष्ट्वा वानरै: सर्वैर्वसुधां कपिलीकृताम्।
कथं क्षपयितव्या: स्युरिति चिन्तापरोऽभवत्॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| सम्पूर्ण पृथ्वी को श्यामवर्ण के वानरों से आच्छादित देखकर उन्हें चिंता हुई कि ये सब किस प्रकार नष्ट हो जाएँगे ॥4॥ |
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| Seeing the whole earth covered with monkeys of the dark colour, he became worried as to how all of them would be destroyed. ॥4॥ |
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