श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.42.4 
स दृष्ट्वा वानरै: सर्वैर्वसुधां कपिलीकृताम्।
कथं क्षपयितव्या: स्युरिति चिन्तापरोऽभवत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण पृथ्वी को श्यामवर्ण के वानरों से आच्छादित देखकर उन्हें चिंता हुई कि ये सब किस प्रकार नष्ट हो जाएँगे ॥4॥
 
Seeing the whole earth covered with monkeys of the dark colour, he became worried as to how all of them would be destroyed. ॥4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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