श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.42.31 
गजो गवाक्षो गवय: शरभो गन्धमादन:।
समन्तात् परिधावन्तो ररक्षुर्हरिवाहिनीम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
गज, गवाक्ष, गवय, शरभ और गंधमादन वानर सेना की रक्षा के लिए सर्वत्र विचरण करने लगे। 31॥
 
Gaj, Gavaksh, Gavay, Sharabh and Gandhamadan started roaming everywhere to protect the monkey army. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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