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ramayan 6.42.27: सुमित्रापुत्र लक्ष्मण और वानरराज सुग्रीव के साथ पराक्रमी श्री रामजी उत्तरी द्वार को घेरे हुए खड़े थे। (जैसा कि पहले बताया जा चुका है, सुग्रीव उत्तर-पश्चिम कोने में रहकर उत्तरी द्वार पर श्री रामजी की सहायता कर रहे थे।)॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.42.27 
उत्तरद्वारमागम्य राम: सौमित्रिणा सह।
आवृत्य बलवांस्तस्थौ सुग्रीवश्च हरीश्वर:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रापुत्र लक्ष्मण और वानरराज सुग्रीव के साथ पराक्रमी श्री रामजी उत्तरी द्वार को घेरे हुए खड़े थे। (जैसा कि पहले बताया जा चुका है, सुग्रीव उत्तर-पश्चिम कोने में रहकर उत्तरी द्वार पर श्री रामजी की सहायता कर रहे थे।)॥27॥
 
The mighty Shri Ram along with Sumitra's son Lakshman and the monkey king Sugreeva stood surrounding the northern gate (Sugreeva, as described earlier, stayed in the north-west corner and helped Shri Ram at the northern gate.)॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)