श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.42.25 
दक्षिणद्वारमासाद्य वीर: शतबलि: कपि:।
आवृत्य बलवांस्तस्थौ विंशत्या कोटिभिर्वृत:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वीर शतबलिनी ने (दक्षिण-पूर्व कोने में स्थित) दक्षिणी द्वार पर आकर बीस करोड़ वानरों से उसे घेर लिया और वहीं डेरा डाल दिया॥ 25॥
 
The brave Shatabalini came to the southern gate (situated in the south-east corner) and surrounded it with twenty crore monkeys and encamped there.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)