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श्लोक 6.42.15  |
ते द्रुमै: पर्वताग्रैश्च मुष्टिभिश्च प्लवंगमा:।
प्राकाराग्राण्यसंख्यानि ममन्थुस्तोरणानि च॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| वे सभी बन्दर अपनी मुट्ठियों से वृक्षों, पर्वत शिखरों तथा असंख्य प्राचीरों और दरवाजों को तोड़ने लगे। |
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| All those monkeys began breaking trees, mountain peaks and innumerable ramparts and doors with their fists. 15. |
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