श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.42.15 
ते द्रुमै: पर्वताग्रैश्च मुष्टिभिश्च प्लवंगमा:।
प्राकाराग्राण्यसंख्यानि ममन्थुस्तोरणानि च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे सभी बन्दर अपनी मुट्ठियों से वृक्षों, पर्वत शिखरों तथा असंख्य प्राचीरों और दरवाजों को तोड़ने लगे।
 
All those monkeys began breaking trees, mountain peaks and innumerable ramparts and doors with their fists. 15.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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