श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.42.12 
उद्यम्य गिरिशृङ्गाणि महान्ति शिखराणि च।
तरूंश्चोत्पाटॺ विविधांस्तिष्ठन्ति हरियूथपा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे वानर सेनापति बड़े-बड़े पर्वत शिखर उठाकर और नाना प्रकार के वृक्षों को उखाड़कर आक्रमण करने के लिए तैयार खड़े थे ॥12॥
 
Those monkey commanders were standing ready to attack by raising huge mountain peaks and uprooting various kinds of trees. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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