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ramayan 6.42.11: सभी वानर योद्धा वहाँ खड़े होकर मन में यह निश्चय कर रहे थे कि या तो वे पर्वत शिखरों से पत्थर बरसाकर लंका के महलों को नष्ट कर देंगे या मुक्कों से प्रहार करके उन्हें नष्ट कर देंगे।   |   ramayan सर्ग 6.42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 42: लङ्का पर वानरों की चढ़ाई तथा राक्षसों के साथ उनका घोर युद्ध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.42.11 
शिखरैर्विकिरामैतां लङ्कां मुष्टिभिरेव वा।
इति स्म दधिरे सर्वे मनांसि हरियूथपा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सभी वानर योद्धा वहाँ खड़े होकर मन में यह निश्चय कर रहे थे कि या तो वे पर्वत शिखरों से पत्थर बरसाकर लंका के महलों को नष्ट कर देंगे या मुक्कों से प्रहार करके उन्हें नष्ट कर देंगे।
 
All the monkey warriors were standing there determined in their minds that they would either destroy the palaces of Lanka by raining stones from the mountain peaks or destroy them by hitting them with their fists.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)