श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  6.41.99 
तस्मिन् महाभीषणके प्रवृत्ते
कोलाहले राक्षसराजयोधा:।
प्रगृह्य रक्षांसि महायुधानि
युगान्तवाता इव संविचेरु:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
जब वह भयंकर कोलाहल आरम्भ हुआ, तब राक्षसराज रावण के योद्धा हाथ में बड़े-बड़े अस्त्र-शस्त्र लेकर प्रलयकाल की प्रचण्ड वायु के समान समस्त दिशाओं में विचरण करने लगे।
 
When that dreadful uproar started, the warriors of the demon king Ravana, carrying large weapons in their hands, began roaming in all directions like the strong winds of the time of doomsday.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे एकचत्वारिंश: सर्ग: ॥ ४ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें इकतालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ४ १॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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