श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  6.41.91 
व्यथयन् राक्षसान् सर्वान् हर्षयंश्चापि वानरान्।
स वानराणां मध्ये तु रामपार्श्वमुपागत:॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
राक्षसों को कष्ट पहुँचाता हुआ और समस्त वानरों का आनन्द बढ़ाता हुआ वह वानर सेना के बीच में श्री रामजी के पास लौट आया ॥91॥
 
Tormenting the demons and increasing the joy of all the monkeys, he returned to Sri Rama in the midst of the monkey army. ॥91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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