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ramayan 6.41.90: इस प्रकार महल की छत तोड़कर वह जोर से दहाड़ता हुआ अपना नाम पुकारता हुआ आकाश में उड़ गया।   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  6.41.90 
भङ्‍क्त्वा प्रासादशिखरं नाम विश्राव्य चात्मन:।
विनद्य सुमहानादमुत्पपात विहायसा॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महल की छत तोड़कर वह जोर से दहाड़ता हुआ अपना नाम पुकारता हुआ आकाश में उड़ गया।
 
Having thus broken the roof of the palace, he roared loudly, shouting his name, and flew away through the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)