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ramayan 6.41.85: उस समय दृढ़ इच्छाशक्ति से संपन्न ताराकुमार अंगद ने अपनी शक्ति दिखाने के लिए स्वयं को राक्षसों के समक्ष प्रस्तुत कर दिया।   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.41.85 
ग्राहयामास तारेय: स्वयमात्मानमात्मवान्।
बलं दर्शयितुं वीरो यातुधानगणे तदा॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
उस समय दृढ़ इच्छाशक्ति से संपन्न ताराकुमार अंगद ने अपनी शक्ति दिखाने के लिए स्वयं को राक्षसों के समक्ष प्रस्तुत कर दिया।
 
At that time, Tarakumar Angada, endowed with strong will, offered himself up to the demons to show his power. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)