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ramayan 6.41.83: उस समय रावण क्रोध में भरकर अपने मन्त्रियों से बार-बार कहने लगा, "इस मूर्ख वानर को पकड़ो और मार डालो।" 83   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  6.41.83 
तत: स रोषमापन्न: शशास सचिवांस्तदा।
गृह्यतामिति दुर्मेधा वध्यतामिति चासकृत्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
उस समय रावण क्रोध में भरकर अपने मन्त्रियों से बार-बार कहने लगा, "इस मूर्ख वानर को पकड़ो और मार डालो।" 83
 
At that time Ravana, filled with anger, repeatedly told his ministers, "Seize this foolish monkey and kill him." 83
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)