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ramayan 6.41.81: अतः यदि तुम मेरे चरणों में गिरकर सीता को आदरपूर्वक नहीं लौटाओगे तो मेरे द्वारा मारे जाओगे और तुम्हारी मृत्यु के पश्चात लंका का सारा धन विभीषण को चला जाएगा ॥81॥   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  6.41.81 
विभीषणस्य चैश्वर्यं भविष्यति हते त्वयि।
न चेत् सत्कृत्य वैदेहीं प्रणिपत्य प्रदास्यसि॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
अतः यदि तुम मेरे चरणों में गिरकर सीता को आदरपूर्वक नहीं लौटाओगे तो मेरे द्वारा मारे जाओगे और तुम्हारी मृत्यु के पश्चात लंका का सारा धन विभीषण को चला जाएगा ॥81॥
 
"Therefore if you do not fall at my feet and respectfully return Sita, you will be killed by me and after your death all the wealth of Lanka will go to Vibhishana." ॥ 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)