श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  6.41.80 
देवदानवयक्षाणां गन्धर्वोरगरक्षसाम्।
शत्रुमद्योद्धरिष्यामि त्वामृषीणां च कण्टकम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
"तुम देवता, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग और राक्षस - सबके शत्रु हो। तुम ऋषियों के लिए काँटा हो; इसलिए आज मैं तुम्हें जड़ से उखाड़ फेंकूँगा।" 80.
 
"You are the enemy of all - the gods, demons, yakshas, ​​gandharvas, serpents and demons. You are a thorn for the sages; therefore, today I will uproot you. 80.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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