श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  6.41.8-9 
तमेवं वादिनं रामं सुग्रीव: प्रत्यभाषत॥ ८॥
तव भार्यापहर्तारं दृष्ट्वा राघव रावणम्।
मर्षयामि कथं वीर जानन् विक्रममात्मन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर सुग्रीव ने श्री राम से इस प्रकार कहा - 'हे वीर रघुनन्दन! अपना पराक्रम जानकर मैं आपकी पत्नी के अपहरणकर्ता रावण को कैसे क्षमा कर सकता हूँ?'॥8-9॥
 
While saying these words, Sugreeva replied to Shri Ram thus - 'O brave Raghunandan! Knowing my prowess, how could I forgive Ravana, the abductor of your wife?'॥ 8-9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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