श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  6.41.78 
आह त्वां राघवो राम: कौसल्यानन्दवर्धन:।
निष्पत्य प्रतियुध्यस्व नृशंस पुरुषो भव॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
माता कौशल्या को आनन्द प्रदान करने वाले राजकुल-तिलक श्री राम ने तुम्हें यह सन्देश दिया है - 'क्रूर रावण! पुरुष बनो, अपने घर से बाहर आओ और युद्ध में मेरा सामना करो।
 
Rajkul-tilak Shri Ram, who brings joy to mother Kausalya, has given you this message - 'Cruel Ravana! Be a man, come out of your house and face me in battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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