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ramayan 6.41.75: वानरराज अंगद स्वर्ण-कंगन धारण किये हुए, प्रज्वलित अग्नि के समान चमकते हुए, रावण के पास आये और वहाँ खड़े हो गये।   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  6.41.75 
ततस्तस्याविदूरेण निपत्य हरिपुंगव:।
दीप्ताग्निसदृशस्तस्थावङ्गद: कनकाङ्गद:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
वानरराज अंगद स्वर्ण-कंगन धारण किये हुए, प्रज्वलित अग्नि के समान चमकते हुए, रावण के पास आये और वहाँ खड़े हो गये।
 
The chief of the monkeys, Angada, wearing golden bracelets and shining like a blazing fire, came near Ravana and stood there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)