श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.41.74 
सोऽतिपत्य मुहूर्तेन श्रीमान् रावणमन्दिरम्।
ददर्शासीनमव्यग्रं रावणं सचिवै: सह॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
श्रीमान अंगद क्षण भर में प्राचीर पार करके रावण के राजमहल में पहुँच गए। वहाँ उन्होंने देखा कि रावण अपने मंत्रियों के साथ शांतिपूर्वक बैठा हुआ है।
 
Shriman Angad crossed the rampart in a single moment and reached the royal palace of Ravana. There he saw Ravana sitting peacefully with his ministers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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