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ramayan 6.41.73: अनायास ही महान कर्म करने वाले भगवान श्री राम के ऐसा कहने पर ताराकुमार अंगद अग्निस्वरूप आकाश में विचरण करने लगे॥73॥   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  6.41.73 
इत्युक्त: स तु तारेयो रामेणाक्लिष्टकर्मणा।
जगामाकाशमाविश्य मूर्तिमानिव हव्यवाट्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
अनायास ही महान कर्म करने वाले भगवान श्री राम के ऐसा कहने पर ताराकुमार अंगद अग्निस्वरूप आकाश में विचरण करने लगे॥73॥
 
On being told by Lord Shri Ram, who performed great deeds spontaneously, star Kumar Angad moved through the sky like the embodiment of fire. 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)