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श्लोक 6.41.70  |
युध्यस्व मा धृतिं कृत्वा शौर्यमालम्ब्य राक्षस।
मच्छरैस्त्वं रणे शान्तस्तत: पूतो भविष्यसि॥ ७०॥ |
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| अनुवाद |
| "राक्षस! वीरता का आश्रय ले और धैर्यपूर्वक मेरे साथ युद्ध कर। युद्धस्थल में मेरे बाणों से शान्त (निष्प्राण) होकर तू शुद्ध (पवित्र एवं निष्पाप) हो जाएगा।" 70. |
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| "Demon! Take recourse to valour and fight with me with patience. By becoming silent (lifeless) by my arrows on the battlefield, you will become pure (pure and sinless)." 70. |
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