श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  6.41.69 
नहि राज्यमधर्मेण भोक्तुं क्षणमपि त्वया।
शक्यं मूर्खसहायेन पापेनाविदितात्मना॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
तू पापी है। तू अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता और तेरे साथी भी मूर्ख हैं; अतः इस प्रकार अधर्मपूर्वक आचरण करने से तू एक क्षण भी इस राज्य का उपभोग नहीं कर सकेगा।
 
"You are a sinner. You do not know your true nature and your companions are also fools; therefore, by behaving in this unrighteous manner, you will not be able to enjoy this kingdom even for a moment. 69.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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