श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  6.41.67 
अराक्षसमिमं लोकं कर्तास्मि निशितै: शरै:।
न चेच्छरणमभ्येषि तामादाय तु मैथिलीम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
"यदि तुम मिथिलेश की पुत्री को अपने संरक्षण में नहीं लोगे तो मैं अपने तीखे बाणों से इस संसार को राक्षसों से रहित कर दूँगा। 67।
 
"If you do not take Mithilesh's daughter under your protection, then I will make this world desolate from demons with my sharp arrows. 67.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas