श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  6.41.66 
बलेन येन वै सीतां मायया राक्षसाधम।
मामतिक्रमयित्वा त्वं हृतवांस्तन्निदर्शय॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
"अरे नीच राक्षस! आज युद्धभूमि में मुझे वह शक्ति दिखाओ, जिससे तुमने मुझे धोखा दिया था और माया द्वारा सीता का हरण किया था।"
 
"You vile demon! Show me on the battlefield today the power by which you deceived me and abducted Sita through illusion."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas