श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.41.65 
पदवीं देवतानां च महर्षीणां च राक्षस।
राजर्षीणां च सर्वेषां गमिष्यसि युधि स्थिर:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
"हे राक्षस! यदि तू युद्ध में दृढ़तापूर्वक खड़ा रहेगा, तो उन समस्त देवताओं, ऋषियों और राजाओं के समान गति को प्राप्त होगा - उन्हीं के समान तुझे परलोक में जाना पड़ेगा ॥ 65॥
 
"O demon! If you stand firmly in the battle, you will attain the status of all those gods, sages and kings - like them, you will have to go to the other world. ॥ 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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