Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.41.58-60h: इस प्रकार राक्षसों का संहार करने के लिए अपनी सेना को उसी स्थान पर तैनात करके, आगे का कर्तव्य जानने की इच्छा से श्री रघुनाथ जी ने मंत्रियों के साथ बार-बार परामर्श किया और निर्णय पर पहुँचकर, साम, दान आदि उपायों के प्रयोग से प्राप्त होने वाले अर्थतत्त्व के विशेषज्ञ श्री राम विभीषण की अनुमति लेकर, राजधर्म का विचार करते हुए, उन्होंने बालिपुत्र अंगद को बुलाया और उससे इस प्रकार कहा - | ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार राक्षसों का संहार करने के लिए अपनी सेना को उसी स्थान पर तैनात करके, आगे का कर्तव्य जानने की इच्छा से श्री रघुनाथ जी ने मंत्रियों के साथ बार-बार परामर्श किया और निर्णय पर पहुँचकर, साम, दान आदि उपायों के प्रयोग से प्राप्त होने वाले अर्थतत्त्व के विशेषज्ञ श्री राम विभीषण की अनुमति लेकर, राजधर्म का विचार करते हुए, उन्होंने बालिपुत्र अंगद को बुलाया और उससे इस प्रकार कहा -
In this way, having stationed his army at the same place to kill the demons, Shri Raghunath ji, desirous of knowing the subsequent duty, consulted repeatedly with the ministers and after reaching a decision, taking the permission of Shri Ram Vibhishan, the expert of Artha Tattva, which can be achieved through the respective use of measures like Sama, Daan etc., thinking of Rajdharma, he called Vali's son Angad and said to him thus -
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥