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ramayan 6.41.56: उस महान् कोलाहल के कारण प्राचीर, द्वार, पर्वत, वन और जंगल सहित सम्पूर्ण लंकापुरी हिल उठी।   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.41.56 
तेन शब्देन महता सप्राकारा सतोरणा।
लङ्का प्रचलिता सर्वा सशैलवनकानना॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
उस महान् कोलाहल के कारण प्राचीर, द्वार, पर्वत, वन और जंगल सहित सम्पूर्ण लंकापुरी हिल उठी।
 
Because of that great uproar the entire Lankapuri including its ramparts, gates, mountains, forests and jungles was shaken. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)