श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.41.52 
आवृत: स गिरि: सर्वैस्तै: समन्तात् प्लवङ्गमै:।
अयुतानां सहस्रं च पुरीं तामभ्यवर्तत॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
समस्त वानरों ने त्रिकूट पर्वत (जिस पर लंका स्थित थी) को चारों ओर से घेर लिया था। उस नगर के सभी द्वारों पर युद्धरत सेना का समाचार पाने के लिए सहस्त्र अयुत (एक करोड़) वानर नगर में घूमते रहते थे।
 
All the monkeys had surrounded the Trikuta mountain (on which Lanka was situated) from all sides. Thousand Ayuta (one crore) monkeys used to roam all around the city to get news of the fighting army at all the gates of that city. 52.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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