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ramayan 6.41.42-43h: जहाँ वानरराज सुग्रीव थे, वहाँ छत्तीस करोड़ विख्यात वानर-नेता राक्षसों को सताते हुए रहते थे।   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  6.41.42-43h 
वानराणां तु षट‍‍्त्रिंशत्कोटॺ: प्रख्यातयूथपा:॥ ४२॥
निपीडॺोपनिविष्टाश्च सुग्रीवो यत्र वानर:।
 
 
अनुवाद
जहाँ वानरराज सुग्रीव थे, वहाँ छत्तीस करोड़ विख्यात वानर-नेता राक्षसों को सताते हुए रहते थे।
 
Where the King of the Monkeys Sugreeva was, there thirty-six crore renowned leaders of the monkeys used to be present, tormenting the demons. 42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)