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ramayan 6.41.38-39h: महाबली वानर सेनापति नील मैद द्विविद के साथ लंका के पूर्वी द्वार पर जाकर खड़ा हो गया।   |   ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  6.41.38-39h 
पूर्वं तु द्वारमासाद्य नीलो हरिचमूपति:॥ ३८॥
अतिष्ठत् सह मैन्देन द्विविदेन च वीर्यवान्।
 
 
अनुवाद
महाबली वानर सेनापति नील मैद द्विविद के साथ लंका के पूर्वी द्वार पर जाकर खड़ा हो गया।
 
The mighty monkey commander Neel Maind along with Dwivid went and stood at the eastern gate of Lanka. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)