श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.41.31 
पताकामालिनीं रम्यामुद्यानवनशोभिताम्।
चित्रवप्रां सुदुष्प्रापामुच्चै: प्राकारतोरणाम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वह सुन्दर झण्डियों और पताकाओं से सुसज्जित था। अनेक उद्यान और वन उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। उसके चारों ओर एक अद्भुत और ऊँची दीवार थी। नगर का मुख्य द्वार उसी दीवार से जुड़ा हुआ था। उन दीवारों के कारण किसी के लिए भी लंकापुरी में पहुँचना बहुत कठिन था। 31.
 
It was decorated with beautiful flags and banners. Many gardens and forests were enhancing its beauty. There was a very amazing and high wall around it. The main gate of the city was attached to that wall. Due to those walls it was very difficult for anyone to reach Lankapuri. 31.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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