श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.41.26 
तत: काले महाबाहुर्बलेन महता वृत:।
प्रस्थित: पुरतो धन्वी लङ्कामभिमुख: पुरीम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाधनुर्धर श्री रघुनाथजी उस विशाल सेना के साथ शुभ समय पर लंकापुरी की ओर चले॥26॥
 
Thereafter, the mighty archer Shri Raghunathji proceeded towards Lankapuri at the auspicious time with that huge army. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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