श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.41.25 
संनह्य तु ससुग्रीव: कपिराजबलं महत्।
कालज्ञो राघव: काले संयुगायाभ्यचोदयत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुग्रीव की सहायता से वानरराज की विशाल सेना को सुसज्जित करके कालवेत्ता भगवान राम ने उसे ज्योतिष द्वारा निर्धारित शुभ समय पर युद्ध के लिए कूच करने का आदेश दिया।
 
Then, with the help of Sugreeva, having equipped the huge army of the King of the Apes, Lord Rama, who had knowledge of time, ordered him to march for the war at an auspicious time prescribed by astrology.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas