श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.41.21 
शैलै: शूलैश्च खड्गैश्च विमुक्तै: कपिराक्षसै:।
भविष्यत्यावृता भूमिर्मांसशोणितकर्दमा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इससे यह संकेत मिलता है कि यह पृथ्वी वानरों और राक्षसों द्वारा फेंके गए पत्थरों, भालों और तलवारों से ढक जाएगी तथा यहां रक्त और मांस की गंदगी जमा हो जाएगी।
 
This indicates that this earth will be covered with boulders, spears and swords hurled by the monkeys and demons and a filth of blood and flesh will accumulate here.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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