श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.41.20 
काका: श्येनास्तथा गृध्रा नीचै: परिपतन्ति च।
शिवाश्चाप्यशुभा वाच: प्रवदन्ति महास्वना:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘कौवे, बाज और गिद्ध गिरकर भूमि पर बैठ जाते हैं और सियार बड़े-बड़े अशुभ शब्द करते हैं।॥20॥
 
‘The crows, hawks and vultures fall down and sit on the ground and the jackals make loud ominous sounds.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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