श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.41.2 
असम्मन्त्र्य मया सार्धं तदिदं साहसं कृतम्।
एवं साहसयुक्तानि न कुर्वन्ति जनेश्वरा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव! तुमने मुझसे परामर्श किए बिना ही यह अत्यन्त साहसपूर्ण कार्य किया है। राजा लोग ऐसा साहसपूर्ण कार्य नहीं करते॥2॥
 
Sugreeva! You have done this very courageous act without consulting me. Kings do not do such daring acts.॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas