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श्लोक 6.41.19  |
दृश्यन्ते न यथावच्च नक्षत्राण्यभिवर्तते।
युगान्तमिव लोकस्य पश्य लक्ष्मण शंसति॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| लक्ष्मण! ये तारे ठीक से चमक नहीं रहे हैं - ये फीके लग रहे हैं। यह अशुभ चिह्न मेरे सामने इस प्रकार प्रकट हो रहा है मानो संसार का प्रलय आ गया हो॥19॥ |
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| ‘Lakshman! These stars are not shining well – they look pale. This inauspicious sign is appearing before me as if it is the doomsday of the world.॥ 19॥ |
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