Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.41.19: लक्ष्मण! ये तारे ठीक से चमक नहीं रहे हैं - ये फीके लग रहे हैं। यह अशुभ चिह्न मेरे सामने इस प्रकार प्रकट हो रहा है मानो संसार का प्रलय आ गया हो॥19॥ | ramayan सर्ग 6.41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृश्यन्ते न यथावच्च नक्षत्राण्यभिवर्तते।
युगान्तमिव लोकस्य पश्य लक्ष्मण शंसति॥ १९॥
अनुवाद
लक्ष्मण! ये तारे ठीक से चमक नहीं रहे हैं - ये फीके लग रहे हैं। यह अशुभ चिह्न मेरे सामने इस प्रकार प्रकट हो रहा है मानो संसार का प्रलय आ गया हो॥19॥
‘Lakshman! These stars are not shining well – they look pale. This inauspicious sign is appearing before me as if it is the doomsday of the world.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥