श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.41.12 
लोकक्षयकरं भीमं भयं पश्याम्युपस्थितम्।
निबर्हणं प्रवीराणामृक्षवानररक्षसाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इस समय मैं प्रजाजनों के संहार का संकेत देने वाला एक भयंकर शकुन देख रहा हूँ, जिससे सिद्ध होता है कि रीछ, वानर और राक्षसों के प्रधान योद्धा मारे जाएँगे॥12॥
 
At this moment I see a terrible omen indicating a massacre of the people, which proves that the chief warriors of the bears, monkeys and demons will be killed.॥ 12॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas