श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.41.11 
परिगृह्योदकं शीतं वनानि फलवन्ति च।
बलौघं संविभज्येमं व्यूह्य तिष्ठाम लक्ष्मण॥ ११॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! शीतल जल से भरे हुए तालाब और फलों से भरपूर वन में आश्रय लेकर हम इस विशाल वानर सेना को विभाजित करके, व्यूह रचना करके युद्ध के लिए तैयार हो जाएँ॥ 11॥
 
Lakshmana! Taking shelter in the pond filled with cool water and the forest rich in fruits, let us divide this huge monkey army, form a battle formation and get ready for the war.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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