श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.41.10 
इत्येवं वादिनं वीरमभिनन्द्य च राघव:।
लक्ष्मणं लक्ष्मिसम्पन्नमिदं वचनमब्रवीत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब वीर सुग्रीव ने ऐसी बातें कहीं, तब उन्हें प्रणाम करके भगवान राम ने सुंदर लक्ष्मण से कहा- ॥10॥
 
When the brave Sugreeva said such things, then after saluting him, Lord Rama said to the handsome Lakshmana - ॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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