श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 41: श्रीराम का सुग्रीव को दुःसाहस से रोकना, लङ्का के चारों द्वारों पर वानरसैनिकों की नियक्ति, रामदत अङद का रावण के महल में पराक्रम तथा वानरों के आक्रमण से राक्षसों को भय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.41.1 
अथ तस्मिन् निमित्तानि दृष्ट्वा लक्ष्मणपूर्वज:।
सुग्रीवं सम्परिष्वज्य रामो वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के शरीर पर युद्ध के चिह्न देखकर लक्ष्मण के बड़े भाई श्री राम ने उसे गले लगा लिया और इस प्रकार कहा:॥1॥
 
Seeing the marks of war on Sugreeva's body, Sri Rama, Lakshmana's elder brother, embraced him and said thus:॥ 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas