Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.4.12: जहाँ कहीं गड्ढे हों, दुर्गम वन हों और साधारण जंगल हों, वहाँ वानरों को उछल-कूद करते हुए इधर-उधर देखते रहना चाहिए कि कहीं शत्रु सेना वहाँ छिपी तो नहीं है (ऐसा भी हो सकता है कि हम आगे बढ़ें और शत्रु पीछे से अचानक आक्रमण कर दे)।॥12॥ | ramayan सर्ग 6.4: श्रीराम आदि के साथ वानर-सेना का प्रस्थान और समुद्र-तट पर उसका पड़ाव । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निम्नेषु वनदुर्गेषु वनेषु च वनौकस:।
अभिप्लुत्याभिपश्येयु: परेषां निहितं बलम्॥ १२॥
अनुवाद
जहाँ कहीं गड्ढे हों, दुर्गम वन हों और साधारण जंगल हों, वहाँ वानरों को उछल-कूद करते हुए इधर-उधर देखते रहना चाहिए कि कहीं शत्रु सेना वहाँ छिपी तो नहीं है (ऐसा भी हो सकता है कि हम आगे बढ़ें और शत्रु पीछे से अचानक आक्रमण कर दे)।॥12॥
The monkeys should jump around in all directions where there are pits, inaccessible forests and ordinary jungles, and keep looking whether the enemy army is hiding there (it may happen that we go ahead and the enemy suddenly attacks from behind).॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥