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ramayan 6.39.23: राक्षसराज रावण का वह चैत्य महल लंकापुरी का रत्न था। सैकड़ों राक्षस, समस्त रक्षा-साधनों से सुसज्जित होकर प्रतिदिन उसकी रक्षा करते थे। 23॥   |   ramayan सर्ग 6.39: वानरों सहित श्रीराम का सुवेलशिखर से लङ्कापुरी का निरीक्षण करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.39.23 
चैत्य: स राक्षसेन्द्रस्य बभूव पुरभूषणम्।
शतेन रक्षसां नित्यं य: समग्रेण रक्ष्यते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण का वह चैत्य महल लंकापुरी का रत्न था। सैकड़ों राक्षस, समस्त रक्षा-साधनों से सुसज्जित होकर प्रतिदिन उसकी रक्षा करते थे। 23॥
 
That Chaitya Palace of demon king Ravana was the jewel of Lankapuri. Hundreds of demons, equipped with all the means of protection, used to protect him every day. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)