श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.37.5 
कार्यसिद्धिं पुरस्कृत्य मन्त्रयध्वं विनिर्णये।
नित्यं संनिहितो यत्र रावणो राक्षसाधिप:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण सदैव इसी नगरी में निवास करता है। अब तुम सब लोग आपस में विचार-विमर्श करके उसे परास्त करने का उपाय निश्चित करो।॥5॥
 
The demon king Ravana always resides in this city. Now you all should discuss amongst yourselves to decide the means of defeating him.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)