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ramayan 6.37.33: ‘युद्ध में वानरों को मनुष्य रूप धारण नहीं करना चाहिए। इस युद्ध में यही हमारी वानर सेना का चिह्न या प्रतीक होगा ॥33॥   |   ramayan सर्ग 6.37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.37.33 
न चैव मानुषं रूपं कार्यं हरिभिराहवे।
एषा भवतु न: संज्ञा युद्धेऽस्मिन् वानरे बले॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘युद्ध में वानरों को मनुष्य रूप धारण नहीं करना चाहिए। इस युद्ध में यही हमारी वानर सेना का चिह्न या प्रतीक होगा ॥33॥
 
‘Monkeys should not assume human form in war. This will be the sign or symbol of the monkey army for us in this war. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)