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ramayan 6.37.27: ‘विशाल पात्र से सुसज्जित वालिकुमार अंगद दक्षिण द्वार पर स्थित हों तथा महापार्श्व और महोदर के कार्य में बाधा डालें ॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.37.27 
अङ्गदो वालिपुत्रस्तु बलेन महता वृत:।
दक्षिणे बाधतां द्वारे महापार्श्वमहोदरौ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘विशाल पात्र से सुसज्जित वालिकुमार अंगद दक्षिण द्वार पर स्थित हों तथा महापार्श्व और महोदर के कार्य में बाधा डालें ॥27॥
 
‘May Valikumar Angad, equipped with a huge vessel, be situated at the south gate and hinders the work of Mahaparshva and Mahodar. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)