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ramayan 6.37.20-21h: तत्पश्चात् रावण के छोटे भाई श्री विभीषण ने स्वयं कमलनयन श्री राम को अपना प्रिय बनाने के लिए उनसे यह अद्भुत बात कही -॥20 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.37.20-21h 
रामं कमलपत्राक्षमिदमुत्तरमब्रवीत्॥ २०॥
रावणावरज: श्रीमान् रामप्रियचिकीर्षया।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रावण के छोटे भाई श्री विभीषण ने स्वयं कमलनयन श्री राम को अपना प्रिय बनाने के लिए उनसे यह अद्भुत बात कही -॥20 1/2॥
 
Thereafter, Ravana's younger brother Shri Vibhishana himself said this wonderful thing to Kamalnayan Shri Ram to endear him to him -॥ 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)