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ramayan 6.37.18: प्रजानाथ! इनमें से प्रत्येक राक्षस के पास युद्ध के लिए दस-दस लाख का परिवार उपस्थित है।॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.37.18 
एकैकस्यात्र युद्धार्थे राक्षसस्य विशाम्पते।
परीवार: सहस्राणां सहस्रमुपतिष्ठते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! इनमें से प्रत्येक राक्षस के पास युद्ध के लिए दस-दस लाख का परिवार उपस्थित है।॥18॥
 
Prajanaath! Each of these demons has a family of ten lakhs present for the war.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)