श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.37.14 
विरूपाक्षस्तु महता शूलखड्गधनुष्मता।
बलेन राक्षसै: सार्धं मध्यमं गुल्ममाश्रित:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘विरुपाक्ष शूलों, तलवारों और धनुषों से सुसज्जित विशाल राक्षस सेना के साथ नगर के मध्य में शिविर पर खड़ा है ॥14॥
 
‘Virupaksha is standing on the camp in the middle of the city with a huge demon army armed with spikes, swords and bows. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)