vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 37: विभीषण का श्रीराम से लङ्का की रक्षा के प्रबन्ध का वर्णन तथा श्रीराम द्वारा लङ्का के विभिन्न द्वारों पर आक्रमण करने के लिये अपने सेनापतियों की नियुक्ति
»
श्लोक 14
श्लोक
6.37.14
विरूपाक्षस्तु महता शूलखड्गधनुष्मता।
बलेन राक्षसै: सार्धं मध्यमं गुल्ममाश्रित:॥ १४॥
अनुवाद
‘विरुपाक्ष शूलों, तलवारों और धनुषों से सुसज्जित विशाल राक्षस सेना के साथ नगर के मध्य में शिविर पर खड़ा है ॥14॥
‘Virupaksha is standing on the camp in the middle of the city with a huge demon army armed with spikes, swords and bows. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×