श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 36: माल्यवान् पर आक्षेप और नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके रावण का अपने अन्तःपुर में जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.36.11 
द्विधा भज्येयमप्येवं न नमेयं तु कस्यचित्।
एष मे सहजो दोष: स्वभावो दुरतिक्रम:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
"मैं बीच में मुखर हो जाऊँगा, परन्तु किसी के सामने झुक न सकूँगा। यह मेरा स्वाभाविक दोष है और मेरे स्वभाव का विरोध करना किसी के लिए भी कठिन है ॥11॥
 
"I will be outspoken in the middle, but I will not be able to bow down before anyone. This is my natural flaw and my nature is difficult for anyone to resist. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)