श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 35: माल्यवान् का रावण को श्रीराम से संधि करने के लिये समझाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.35.24 
उत्पातान् विविधान् दृष्ट्वा घोरान् बहुविधान् बहून्।
विनाशमनुपश्यामि सर्वेषां रक्षसामहम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार की भयंकर विपत्तियाँ देखकर मैं इन समस्त राक्षसों के विनाश का अवसर देखता हूँ॥ 24॥
 
Having observed many dreadful calamities of various kinds, I see the present opportunity of the destruction of all these demons.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)